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अमेरिका की क्रान्ति के 05 कारण

अमेरिका की क्रान्ति के 05 कारण संयुक्त राज्य अमेरिका जो आज विश्व की सबसे बड़ी शक्ति है, सत्रहवीं शताब्दी के आरम्भ में अपने विकास की आरम्भिक अवस्था में था और यूरोपीय देशों को अधीनता में था। अमेरिका पहुँचने वाले प्रथम यूरोपीय लोग 1000 ईस्वी के लगभग, आइसलैंड एवं ग्रीनलैण्ड के नोर्स समुद्री लोग (Norse Seamen) […]

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यूरोप में पूँजीवाद के उद्भव के 07 कारण

यूरोप में पूँजीवाद के उद्भव के 07 कारण यूरोप में पूँजीवाद का अभ्युदय 15वीं शताब्दी में हो गया था इसका बीजारोपण ब्रिटिश पूँजीवादी क्रान्ति से माना जाता है (इंग्लैण्ड का गृह युद्ध, 1639 48) । जब इंग्लैण्ड के तानाशाही राजा चाल्ल्स प्रथम का सिर काट कर बांस पर टांग कर उसका अन्त कर दिया था […]

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यूरोप में पूंजीवाद का उद्भव

यूरोप में पूँजीवाद का उद्भव यूरोपीय संदर्भ में इतिहासकार जे.ई. स्वेन ने लिखा है कि, “मध्य युग सामान्यतः उस काल के लिए प्रयुक्त किया जाता है, जो कि पश्चिमी यूरोप में रोमन साम्राज्य के पतन से पुनर्जागरण और धर्म सुधार आन्दोलन के प्रारम्भ तक चलता है।” इस प्रकार अतीत की घटनाओं के आधार पर यूरोपीय […]

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All about प्रतिवादी धर्मसुधार

All about प्रतिवादी धर्मसुधार प्रोटेस्टेण्ट धर्मसुधार आन्दोलन की सफलता के बाद सन् 1540 ई. के आस-पास ऐसा प्रतीत होने लगा था कि पारस्परिक कैथोलिक ईसाईवाद अपनी आखिरी साँसे गिनने की कगार पर आ गया है। उत्तरी एवंकेन्द्रीय जर्मनी, लूथरवाद के प्रभाव में कैथोलिक धर्म को अस्वीकार कर चुका था। स्कैन्डिनेविया पूरी तरह से लूधरवादी हो […]

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धर्मसुधार आंदोलन के 07 परिणाम

धर्मसुधार आंदोलन के 07 परिणाम सोलहवीं शताब्दी में यूरोप के इतिहास में घटित धर्मसुधार आन्दोलन ने यूरोप के धार्मिक परिदृश्य पर तो भारी उथल-पुथल मचा ही दी, साथ ही इसके कुछ प्रभाव यूरोप के राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक जीवन में भी दिखाई देने लगे। जैसा कि ल्यूकस (रिनेसां एंड दि रेफर्मेशन) ने लिखा है, ‘सोलहवीं […]

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धर्मसुधार आन्दोलन की 03 धाराएँ

धर्मसुधार आन्दोलन की 03 धाराएँ धर्मसुधार आन्दोलन या प्रोटेस्टेंट क्रान्ति का सूत्रपात सबसे पहले मार्टिन लूथर के द्वारा जर्मनी में हुआ। जहाँ पुनर्जागरण का प्रारम्भ सबसे पहले इटली में हुआ, वहाँ धर्मसुधार आन्दोलन की लहरें सबसे पहले जर्मनी में दिखाई दीं जर्मनी के बाद यूरोप के अन्य देशों में भी धर्मसुधार आन्दोलन की भावना प्रसारित […]

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धर्मसुधार आंदोलन के 06 कारण

धर्मसुधार आंदोलन के 06 कारण धर्मसुधार आन्दोलन का अर्थ धर्मसुधार आन्दोलन (Reformation ) यूरोप में ईसाई धर्म के प्रति, सोलहवीं शताब्दी में घटित हुई, उस धार्मिक असंतोष एवं विप्लव को कहा जाता है जिसके परिणामस्वरूप ईसाई धर्म के अनुयायी स्पष्टत: दोभागों में बँट गये-कैथोलिक ईसाई एवं प्रोटेस्टेण्ट ईसाई । यह असंतोष इतने मुखर एवं बलवती […]

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दक्षिण का चोल राज्य

दक्षिण का चोल राज्य दक्षिण भारत में ईसा से सौ वर्ष पूर्व चोल लोग राज्य करते थे, जिनका आधिपत्य ई० पश्चात् तन शताब्दो तक कायम रहा। उसके पश्चात् वहां पाण्ड्य और चेरो के शासन का विकास-काल आया, जिसने चोलों को समाप्त कर अपना अधिकार जमाया|। यहां दूसरी शताब्दी में जो करिकाल राजा हुआ, वह महान […]

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दक्षिण का पल्लव राज्य

दक्षिण का पल्लव राज्य डा० काशीप्रसाद जायसवाल के अनुसार पल्लव शब्द का अर्थ दुष्ट है। इसी दुष्ट अर्थ के कारण इतिहासकार पल्लवों को कोई जंगली जाति की संज्ञा दे बैठे। एक चोल राजकुमार का मनीपल्लम् के नागराजा की कन्या से विवाह सम्पन्न हुआ था। उस कन्या का पुत्र टौण्डमण्डलम का शासनाध्यक्ष राजा बना। टौण्डमण्डलम की […]

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पुष्यभूति वंश का इतिहास

पुष्यभूति वंश का इतिहास गुप्त साम्राज्य को समाप्ति के पश्चात् एकछत्र साम्राज्य का अन्त हुआ। देश विभिन्न छोटे-बड़े राज्यों में विभक्त हो गया| इन राज्यों के शासक आपस में संघर्षरत रहते। न किसी को देश की सुरक्षा का ध्यान था न जन-हित की चिन्ता। देश किसी सार्वभौम सत्ता के अभाव में अशक्त बन गया। छठी […]