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यूरोप में पूँजीवाद के उद्भव के 07 कारण

यूरोप में पूँजीवाद के उद्भव के 07 कारण यूरोप में पूँजीवाद का अभ्युदय 15वीं शताब्दी में हो गया था इसका बीजारोपण ब्रिटिश पूँजीवादी क्रान्ति से माना जाता है (इंग्लैण्ड का गृह युद्ध, 1639 48) । जब इंग्लैण्ड के तानाशाही राजा चाल्ल्स प्रथम का सिर काट कर बांस पर टांग कर उसका अन्त कर दिया था […]

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दक्षिण का चोल राज्य

दक्षिण का चोल राज्य दक्षिण भारत में ईसा से सौ वर्ष पूर्व चोल लोग राज्य करते थे, जिनका आधिपत्य ई० पश्चात् तन शताब्दो तक कायम रहा। उसके पश्चात् वहां पाण्ड्य और चेरो के शासन का विकास-काल आया, जिसने चोलों को समाप्त कर अपना अधिकार जमाया|। यहां दूसरी शताब्दी में जो करिकाल राजा हुआ, वह महान […]

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दक्षिण का पल्लव राज्य

दक्षिण का पल्लव राज्य डा० काशीप्रसाद जायसवाल के अनुसार पल्लव शब्द का अर्थ दुष्ट है। इसी दुष्ट अर्थ के कारण इतिहासकार पल्लवों को कोई जंगली जाति की संज्ञा दे बैठे। एक चोल राजकुमार का मनीपल्लम् के नागराजा की कन्या से विवाह सम्पन्न हुआ था। उस कन्या का पुत्र टौण्डमण्डलम का शासनाध्यक्ष राजा बना। टौण्डमण्डलम की […]

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पुष्यभूति वंश का इतिहास

पुष्यभूति वंश का इतिहास गुप्त साम्राज्य को समाप्ति के पश्चात् एकछत्र साम्राज्य का अन्त हुआ। देश विभिन्न छोटे-बड़े राज्यों में विभक्त हो गया| इन राज्यों के शासक आपस में संघर्षरत रहते। न किसी को देश की सुरक्षा का ध्यान था न जन-हित की चिन्ता। देश किसी सार्वभौम सत्ता के अभाव में अशक्त बन गया। छठी […]

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विक्रमादित्य : भ्रातियों के बादल के पीछे छुपा हुआ भारत का महान राजा

विक्रमादित्य : भ्रातियों के बादल के पीछे छुपा हुआ भारत का महान राजा ‘देव कथाओं के अनुसार विक्रमादित्य उज्जयिनी का राजा था, जिसके दरबार में नवरत्न थे इन नवरत्नों में कालिदास भी एक थे। कहा जाता है, वह बहुत पराक्रमी राजा था। उसने शकों को परास्त कर सुदृढ़ राज्य स्थापित किया था ईसा पूर्व 58- […]

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भारत पर यूनानी आक्रमण

भारत पर यूनानी आक्रमण ग्रीक लोग स्वयं को मैसिपोटामिया निवासियों से अधिक सभ्य और सुसंस्कृत समझते थे। जब ईरान ने ग्रीकों पर चढाई का विचार किया तो ग्रीकों ने उनका मजाक उड़ाया और जंगली तथा असभ्य कहकर सम्बोधित किया। 338 ई० पू० फिलिप्स ने ग्रीकों पर आक्रमण कर दिया और साधारण से युद्ध के पश्चात् […]

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ब्राह्मणकालीन व्यवस्था

ब्राह्मणकाल व्यवस्था (1500 ई० पू० से 500 ई० पू०) जिस समय महाभारत का महायुद्ध लड़ा गया, उस समय सम्पूर्ण देश विभिन्न राज्यों में विभाजित था और सबकी अपनी-अपनी प्रशासनिक व्यवस्थाएं थीं, परन्तु राजनीतिक दृष्टि से स्पष्ट है कि सत्ता केन्द्रित थी । हस्तिनापुर का सम्राट सर्वशक्तिसम्पन्न समझा जाता था, जिसकी ध्वजा के नीचे अन्य राजे […]

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आर्य राज्य-व्यवस्था

आर्य राज्य-व्यवस्था आयों में राजा और राज्य-व्यवस्था प्रणाली आरम्भ होने से पूर्व भारत में तात्कालिक सामाजिक दशा अनेकों क्षेत्रों में व्यवस्था ग्रहण कर चुकी थी। संस्कृति का आरम्भिक रूप पर्याप्त ज्वलंत है। जिन सिद्धान्तों का उल्लेख उन काल-ग्रन्थों में आरोपित है, वे आज भी अक्षुण्ण बने हैं । इस संस्कृति के मध्यकालीन परिवर्तन इसके मूल […]

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वेदकालीन साहित्य और समाज

वेदकालीन साहित्य और समाज वैवस्वत परम्परानुसार राजवंशों की 95 पीढ़ियों का उल्लेख प्राप्त होता है। इन राजवंशों की 36 पीढ़ियों के समाप्त होने पर वैदिक मन्त्रों का निर्माण- कार्य आरम्भ हुआ। यह कार्य ऋषियों की एक परम्परा को सौंपा गया। जो मन्त्र-श्रुति द्वारा चले आ रहे थे, उनका संकलन कर वेदों का रूप दिया गया […]

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भारत और प्रागैतिहासिक काल

भारत और प्रागैतिहासिक काल निश्चयपूर्वक नहीं कहा जा सकता कि पृथ्वी पर जीवों की उत्पत्ति कितने वर्ष पूर्व हुई होगी और उसका आरम्भिक रूप कैंसा और किस प्रकार का रहा होगा इस विषय में, विभिन्न विद्वानों ने अपने जो मत प्रकट किए हैं, उनमें कल्पना और अनुमान का ही अधिक आश्रय लिया गया है। जन्म […]