भारतीय वास्तु-विद्या का जन्म, विकास एवं विशेषता

भारतीय वास्तु-विद्या का जन्म, विकास एवं विशेषता भारतीय वास्तु-विद्या का जन्म वेदाङ्ग-घटक (विशेषत: ज्योतिष एवं कल्प) से हुआ । यतः भारतीय वास्तु-कला का प्राश्रय धर्म रहा है, अतः धार्मिक संस्कारों, यज्ञों एवं पूजाश्रों के सम्बन्ध में आवश्यक भूमिचयन, भू-संस्कार, भूमि के मान और उन्मान (नाप-जोख) एवं वेदि-रचना आदि-आदि आवश्यकीय अंगों के सम्बन्ध में जो निर्देश … Continue reading भारतीय वास्तु-विद्या का जन्म, विकास एवं विशेषता