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अमेरिकी क्रान्ति के 05 परिणाम

अमेरिकी क्रान्ति के 05 परिणाम

अमेरिका की क्रान्ति या स्वतन्त्रता संग्राम विश्व इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण एवं युगांतरकारी घटना थी। विश्व के इतिहास में राजनीतिक दृष्टि से इस क्रान्ति का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान यह था कि इसने
राजतन्त्र एवं कुलीनतन्त्र के स्थान पर लोकतन्त्र के आदर्श को प्रतिष्ठापित किया। इस दृष्टि से अमेरिका की
क्रान्ति फ्रांस की क्रान्ति की पूर्वगामी थी। एक दूसरा महत्त्वपूर्ण राजनीतिक प्रयोग जो क्रान्ति के फलस्वरूप
अमेरिका में किया गया, वह था संघात्मक राज्य की स्थापना का। इसी अर्थ में अमेरिका को ‘संयुक्त राज्य
अमेरिका’ की संज्ञा दी गई जो आज भी प्रचलित है। तीसरा नवीन राजनीतिक योगदान अमेरिकी क्रान्ति का
यह था कि अमेरिका वह पहला राष्ट्र था जिसमें कि एक लिखित संविधान को लागू किया गया| हेज ( माॉर्डन यूरोप टू 1870) के शब्दों में, ‘अमेरिकी क्रान्ति के परिणामस्वरूप एक ऐसे राष्ट्र का जन्म हुआ जिसने पुरातन काल की अनेक राजनीतिक परम्पराओं को चुनौती देते हुये, आधुनिक विश्व के सामने यह उदाहरण प्रस्तुत किया कि अब तक न आजमाये गये प्रयोगों के आधार पर वह समर्थ एवं समृद्ध हो सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, एक बड़े आकार का और बड़ी जनसंख्या वाला पहला राष्ट्र था, जिसने एक स्थायी गणतन्त्र की स्थापना की, राजतन्त्र का उन्मूलन किया तथा अभिजात कुलीनतन्त्र को प्रतिबन्धित किया। यह पहला राष्ट्र था जिसने संघवाद को लागू किया जिसके अन्तर्गत स्थानीय स्वायत्तता को एक उदार सीमा तक सुरक्षित रखते हुये केन्द्रीय सरकार को वास्तविक शक्ति प्रदान की गई। यह पहला राष्ट्र था जिसने अपने मूलभूत एवं स्थायी कानून को एक विस्तृत लिखित संविधान के द्वारा स्वीकार किया एवं अपनाया।

अमेरिका की क्रान्ति ने अपनी परवर्ती फ्रांसीसी क्रान्ति की भाँति आर्थिक एवं सामाजिक स्तरों पर समग्र एवं आधारभूत रूपान्तरण को जन्म नहीं दिया, ऐसा इसलिये क्योंकि अमेरिकी क्रान्ति का मूल अभिप्रेत राजनीतिक स्वशासन एवं स्वतन्त्रता की प्राप्त था, लेकिन फिर भी क्रान्ति के फलस्वरूप अमेरिका के सामाजिक- आर्थिक जीवन में अनेक महत्त्वपूर्ण परिवर्तनों की शुरुआत हुई। क्रान्ति के बाद अमेरिका में स्वतन्त्र एवं मुक्त चिन्तन पर आधारित एक नवीन जीवन पद्धति का विकास हुआ।

अमेरिकी क्रान्ति या स्वातन्त्र्य संग्राम का अन्तर्राष्ट्रीय जगत पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा। जिन सिद्धान्तों
एवं आदर्शों को अमेरिकी क्रान्ति ने मूर्तिमान किया था, उनका अन्य देशों के जीवन पर प्रेरणास्पद एवं परिवर्तनकारी प्रभाव हुआ। कहा गया है कि विचारों के पंख होते हैं, तथा मुक्ति और स्वातंत्र्य के विचार तो
बड़ी तेजी से प्रसारित होते हैं।

यह निर्विवाद है कि अमेरिका की क्रान्ति ने अपनी परवर्तीं फ्रांस की महत्त्वपूर्ण क्रान्ति (1789) को वैचारिक प्रेरणा प्रदान की। बहुत सारे फ्रांसीसी नवयुवकों ने, जिनमें लफायते भी था, अमेरिका में जा वाशिंगटन की सेना के साथ अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध में भाग लिया था और ये युवक, जैसा कि हेज ने लिखा है। ‘गणतंत्रात्मक गुणों की शक्ति और प्रजातांत्रिक सादगी के सौन्दर्य के रूमानी उत्साह के साथ फ्रांस वापिस लौटे थे ‘ स्वयं ब्रिटेन में अमेरिकी क्रान्ति के परिणामस्वरूप, उदारवादी एवं प्रजातांत्रिक विचारों को अधिक विस्वरूप में लागू करने का प्रयास किया गया। आयरलैण्ड की संसद को 1782 में लगभग स्वतन्त्र रूप प्रदान क दिया। 1784 में ब्रिटिश संसद ने एक ‘बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल’ की स्थापना की जिसका कार्य भारत सरकार की गतिविधियों का निरीक्षण करना था तथा यह देखना था कि ईस्ट इण्डिया कम्पनी कहीं अपने विशेषाधिकास का दुरुपयोग तो नहीं कर रही है। अमेरिकी क्रान्ति की सफल ध्वनि की गूंज विश्व के विभिन्न उपनिवेशों के लोगों ने भी सुनी जहाँ आर्थिक शोषण के प्रति आक्रोश जाग्रत हुआ और स्वातन्त्र्य-समर्धक एवं राजवा विचारों को सम्बल मिला।

अमेरिकी क्रान्ति या स्वतन्त्रता संग्राम के प्रभाव एवं परिणामों का विश्लेषण निम्नलिखित बिन्दुओं के
अन्तर्गत किया जा सकता है

01 राजनीतिक प्रभाव

अमेरिकी क्रान्ति का एक महत्त्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव या परिणाम था- राजतन्त्र या कुलीनतन्त्र के स्थान पर लोकतन्त्र की स्थापना एच.बी. पार्क्स के शब्दों में, ‘क्रान्ति का अमेरिका के आन्तरिक विकास पर एक स्थायी प्रभाव यह हुआ कि लोकतन्त्र की दिशा में बड़ी महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई, यद्यपि अमेरिका के कुछ प्रांतों में यह प्रगति अन्य प्रांतों की तुलना में कहीं अधिक थी। अमेरिका के कनेक्टिकट एवं रोढ़ द्वीपों को छोड़कर अन्य सभी राज्यों में क्रान्ति से पूर्व राजतंत्रात्मक या धनतंत्रात्मक गवर्नर या शासक थे, अतः इन सभी राज्यों को अपने संविधान में परिवर्तन करना पड़ा।

अमेरिका के सभी राज्यों ने लोकतंत्रात्मक आधार पर अपने नये संविधानों की रचना की जिनकी मुख्य
विशेषतायें थीं-मताधिकार में वृद्धि विधाननिर्मात्री सभाओं में शक्ति का केन्द्रीकरण, वार्षिक चुनाव एवं
अधिकारों के बिल द्वारा सरकारी सत्ता पर अंकुश। यह उल्लेखनीय है कि अमेरिका के हर राज्य के संविधान
में अधिकारों के बिल का विस्तृत उल्लेख किया गया, जिन्हें बाद में अमेरिकी संघात्मक संविधान में शामिल
कर लिया गया इन अधिकारों में मनुष्य के उन नैसर्गिक एवं अनअपरहणीय अधिकारों (जैसे कि स्वतन्त्रता
एवं समानता का अधिकार) का उल्लेख था जिनकी घोषणा 1776 में स्वतनत्रता के घोषणा पत्र में की गई।
मनुष्य के मूलभूत अधिकारों की सांविधानिक स्वीकृति भी अमेरिकी क्रान्ति की एक महत्त्वपूर्ण देन थी फ्रांस
की क्रान्ति से पूर्व ही स्वतन्त्रता एवं समानता के मूलभूत मानवीय अधिकारों की औपचारिक स्वीकृति अमेरिकी क्रान्ति का एक खूबसूरत तोहफा है जो उसने संसार को दिया।

अमेरिकी क्रान्ति द्वारा प्रस्तुत नवीन राजनीतिक आदर्शों- स्वशासन एवं स्वातन्त्र्य, लोकतंत्रात्मक सरकार, संघात्मक गणराज्य, लिखित संविधान एवं मानव के मूलभूत अधिकारों की स्वीकृति, इन सभी का
अन्तर्राष्ट्रीय जगत पर व्यापक एवं दूरगामी प्रभाव पड़ा

02 सामाजिक प्रभाव

अमेरिकी क्रान्ति का महत्त्वपूर्ण सामाजिक परिणाम यह हुआ कि स्वतन्त्रता के साथ-साथ समानता को भी मनुष्य के नैसर्गिक (natural ) एवं अनअपहरणीय (inalicnable) अधिकार के रूप में स्वीकार कर लिया गया इसका अर्थ यह हुआ कि इसके पूर्व अमेरिकी समाज में जिन व्यक्तियों- जमींदारों, कुलीनों, धर्म विशिष्ट लोगों आदि को पारम्परिक एवं आनुवंशिक विशेषाधिकार मिले हुये थे, उन्हें सिद्धान्ततः अस्वीकृत कर दिया गया । लेकिन क्या इसे व्यावहारिक रूप में भी रूपान्तरित किया गया ? हाँ लेकिन आंशिक रूप में न्यूयार्क, वर्जीनिया, जार्जिया, साऊथ कैरोलिना एवं दक्षिण के अन्य अनेक प्रांतों में अनुक्रमबन्ध
(entail) एवं ज्येष्ठाधिकार (primogeniture) के सामंती सिद्धान्त प्रचलित थे ‘अनुक्रमबन्ध’ के अधिकार का अर्थ था कि एक एस्टेट या जागीर का स्वामी उसे न तो बेच सकता था, न उसके किसी अंश को किसी को दे सकता है। ज्येष्ठाधिकार के नियम के अनुसार, जागीर के स्वामी की मृत्यु पर उसका ज्येष्ठतम पुत्र उसकी सम्पूर्ण अविभाज्य सम्पत्ति का स्वामी बन जाता था इसका परिणाम यह हुआ कि अमेरिका में एक स्थायी भू- स्वामी कुलीन वर्ग विकसित हो गया था जिनकी पारिवारिक जागीरें अविभाजित बनी रहती थीं अमेरिका के वजीनिया राज्य में अनुक्रमबन्ध एवं ज्येष्ठाधिकार की परम्परा पुरानी एवं अधिक रूढ़ थीं जैफरसन ( नोट्स आन वर्जीनिया) ने लिखा है कि ‘वर्जीनिया प्रांत में बड़े-बड़े सम्भ्रान्त कुल बहुत से हो गये थे जिनमें एक सामन्ती व्यवस्था बन गई थी जिसके संस्थानों की एक अलग शान और विलासिता थी। वर्जीनिया में 1776 में अनुक्रमबन्ध नियम को समाप्त कर दिया गया तथा 1785 में ज्येष्ठाधिकार के नियम को। अमेरिका के अन्य सभी प्रांतों में भी, क्रांतिकाल के दौरान या उसके बाद, उपर्युक्त दोनों सामंती नियमों को समाप्त कर दिया गया ।


सामाजिक समानता की दिशा में यह एक महत्त्वपूर्ण कदम था। इस सम्बन्ध में एक रोचक प्रसंग उल्लेखनीय है। वर्जीनिया में जब ज्येष्ठाधिकार के नियम को समाप्त करने के सम्बन्ध में बहस चली तो किसी ने यह प्रस्ताव रखा कि ज्येष्ठतम पुत्र को अन्य उत्तराधिकारियों की तुलना में कम से कम दुगुना हिस्सा दिया जाना चाहिये। इसके जवाब में जैफरसन ने कहा, ‘नहीं, तब तक नहीं, जब तक कि उसकी खुराक दुगुनी न हो और वह दुगुना काम न करता हो। क्रान्ति के बाद, विभिन्न प्रांतों में अवस्थित ब्रिटिश सम्राट की तमाम जमीनों तथा धनी स्वामिभक्त टोरियों के विशाल भूखण्डों को अमेरिका की नयी प्रांतीय सरकारों द्वारा अवाप्त कर लिया गया । पेनसिलवेनिया, मेरीलैण्ड, वर्जीनिया, नार्थ कैरोलिना, वेस्ट चेस्टर, मैसाचूसेट्स तथा न्यूयार्क में इस प्रकार की बहुत बड़ी-बड़ी जागीरें अवस्थित थीं, इन सभी को जब्त कर लिया गया। इस सम्बन्ध में नेविन्स एवं कौमेजर ने लिखा है, ‘ऊपरी न्यूयार्क में सर जॉन जॉनसन की जब्त की हुई जागीर ने अन्ततः दस हजार किसानों को आश्रय दिया।

मैसेचूसेट्स ने भी बहुत-सी जमीनें जब्त कर लीं। इनमें सर विलियम पैपरेल की मेन में स्थित जागीर भी थी,
जो इतनी विशाल थी कि उसका मालिक उसमें एक सीधी रेखा में तीस मील तक घोड़े पर चढ़कर जा सकता था। न्यूहैम्पशायर से जहाँ सर जॉन वैटवर्थ ने अपनी जागीर खोई, जार्जिया तक, जहाँ पर जेम्स राइट को वैसे ही भाग्य का सामना करना पड़ा, छोटे किसान खुशी से उन धनधान्यपूर्ण जमीनों पर चले गये, जिन पर किसी।समय, वे केवल सेवकों के रूप में ही जा सकते थे।’


अमेरिकी क्रान्ति की उदारवादी लहर ने अमेरिका में दास प्रथा की समाप्ति के आंदोलन को भी सम्बल
प्रदान किया। अमेरिका के उत्तरी राज्यों में दासों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी और उनका आर्थिक महत्त्व भी कम था, लेकिन इन राज्यों ने क्रमश: एक के बाद एक, दासों की तात्कालिक या समयबद्ध मुक्ति की घोषणा की। उदाहरण के लिये, मैसाचूसेट्स में 1781 में हुए एक न्यायिक निर्णय के परिणामस्वरूप सभी दासों को मुक्त घोषित कर दिया गया। दक्षिणी अमेरिका के राज्यों में दासों की समस्या अधिक जटिल थी, और उनकी तात्कालिक मुक्ति का कार्य सम्भव नहीं लग रहा था, यद्यपि सिद्धान्ततः दास-प्रथा के औचित्य को सिद्ध करने वाले लोग बहुत कम रह गये थे। दक्षिणी राज्यों ने यद्यपि दास प्रथा की समाप्ति के निर्णय को बाद के लिए स्थगित कर दिया गया, लेकिन साउथ कैरोलिना एवं जार्जिया के अतिरिक्त अन्य सभी राज्यों ने विदेशों से नये दासों के आयात पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

03 आर्थिक प्रभाव

अमेरिकी क्रान्ति की सफलता से ब्रिटिश वाणिज्यवाद के सिद्धान्त एवं ब्रिटिश सरकार के वाणिज्यवादी हितों को गहरा धक्का लगा। वाणिज्यवाद के सिद्धान्त के अनुसार, ब्रिटेन ने अमेरिका को इंग्लैण्ड के औद्योगिक केन्द्रों पर निर्मित वस्तुओं के बाजार के रूप में विकसित करने का प्रयास किया था और तदूनुसार उसने अमेरिका में उद्योग-धन्धों के विकास को अवरुद्ध बनाये रखा।

क्रान्ति के बाद, अमेरिका ने अपने आर्थिक विकास की स्वतन्त्र दिशायें तय कीं। आरम्भिक आर्थिक अव्यवस्था के बाद, देश दृढ़ता से आगे की ओर बढ़ने लगा। विशाल भू-जागीरों की सरकार द्वारा अवासति एवं भूस्वामित्व के नये नियमों से छोटे एवं मध्यवर्गीय किसानों को लाभ हुआ और कृषि के प्रति उनका उत्साह बढ़ा। नेविल्स एवं कौमेजर के अनुसार, ‘अब अमेरिका में छोटी-सी रकम से अच्छे फार्म प्राप्त किये जा सकते थे। पुरानी दुनिया से आव्रजकों का ऐसा तांता लगा था कि कभी-कभी अमेरीकी लोग सोचते थे कि आधा पश्चिमी यूरोप उनके देश में खिंचा चला आ रहा है। सरकार इस आव्रजन को पसन्द करती थी और जॉर्ज वाशिंगटन खास तौर से इस विचार को पसन्द करता था कि विशेषज्ञ किसान ब्रिटेन से लाये जायें और अमेरीकियों को बेहतर कृषि विधियाँ सिखाएं । ऊपरी न्यूयार्क में योहॉक और टेनेसी की विशाल घाटियाँ, पैनसिलवेनिया में सस्केहान्ना घाटी और वर्जीनिया में शेनानडोआ घाटी जल्दी ही विशाल गेहूँ उत्पादक क्षेत्र बन गये।

क्रान्ति के बाद, अमेरिका में स्थानीय उद्योग-धन्धों का विकास होने लगा अमेरिका के आन्तरिक
औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से अमेरिका के बहुत से राज्यों ने विदेशी वस्तुओं के आयात पर भारी सीमा-शुल्क लगा दिये। मेसाचूसेट्स और रोढ आइलैण्ड में वस्त्र निर्माण उद्योग का तेजी से विकास होने लगा, तो कनेक्टिकट राज्य में घड़ियों का निर्माण एवं टीन का सामान बनने लगा अमेरिका के मध्यवर्ती राज्यों में कांच, लोहे और कागज की वस्तुओं के उद्योगों का विकास होने लगा चूँकि अमेरिका में इस समय कोई औद्योगिक नगर नहीं था, न नगरों में औद्योगिक केन्द्र बने थे, अत: निर्माण कार्य प्रायः घरों में ही किया जाता था और औरतें भी इसमें भाग लेती थीं।


अमेरिका में इस काल में जहाजरानी उद्योग का भी तेजी से विकास हुआ जिसने अमेरिका के विदेशी व्यापार की प्रगति में बड़ी सहायता की। बहुत से विदेशी राष्ट्रों ने अमेरिकी व्यापारियों के लिये अपने बन्दरगाह खोल दिये। 1790 तक अमेरिका का विदेशी व्यापार जोरों पर था, और अमेरिका के प्रत्येक बन्दरगाह पर जहाजों का आवागमन, औपनिवेशिक काल की तुलना में बहुत अधिक था। व्यापारियों ने विदेशी व्यापार के एक नये समुद्री मार्ग को ढूंढ़ निकाला जो आने वाले समय में अमेरीकी व्यापारियों के लिय प्रचुर लाभ का हेतु बना। इस नये मार्ग पर 1784 में अमेरिका के जहाज ‘एम्प्रेस ऑफ चाइना’ ने न्यूयार्क से पेसिफिक महासागर अमेरिका की क्रान्ति के रास्ते चीन एवं ईस्ट इण्डीज की यात्रा की। वाणिज्य को प्रोत्साहित करने के लिये अमरीका के पहले व्यापारिक बैंकों की स्थापना फिलाडेल्फिया एवं बोस्टन में की गई।

04 धार्मिक प्रभाव

अमेरिकी क्रान्ति का एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक प्रभाव यह हुआ कि अमेरिकावासियों को पूर्ण धार्मिक स्वतन्त्रता मिल गई । अमेरिका के लगभग सभी प्रान्तों में (न्यू इंग्लैण्ड को छोड़कर) चर्च एवं राज्य का पृथक्करण हो गया। इससे पूर्व अमेरिकावासियों से बिशपसंघवादी (Episcopalian) चर्च के लिये, न्यूयार्क एवं मेरीलैंड के दक्षिण में स्थित सभी प्रान्तों में, राज्य द्वारा धार्मिक टैक्स वसूल किया जाता था इस प्रथा को बन्द कर दिया गया नार्थ कैरोलिया ने 1776 में एक संविधान बनाया जिसमें धार्मिक स्वतन्त्रता प्रदान की गई। 1777 में जार्जिया, तथा 1778 में साउथ कैरोलिना ने भी अपने संविधानों के द्वारा धार्मिक स्वतन्त्रता को स्वीकृत कर लिया। क्रमशः अमेरिका के अन्य प्रांतों ने भी यही किया। धार्मिक स्वतन्त्रता के आदर्श का सबसे प्रभावशाली वक्तव्य ‘वर्जीनिया के धार्मिक स्वतन्त्रता अधिनियम’ (Virginia Statute of Religious Liberty) में देखने को मिलता है, जिसे 1779 में जेफरसन द्वारा तैयार किया गया था लेकिन जिसे एक लम्बे वादविवाद के बाद 1786 में पारित किया गया। इस बिल में कहा था कि सरकार को चर्च के मामलों में या अन्तरात्मा के मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और किसी भी तरह के धार्मिक विश्वासों के लिये कोई वर्जना नहीं लादनी चाहिए। हेज के अनुसार, ‘अमेरिका वह पहला राष्ट्र था जिसने औपचारिक तौर पर।धर्म को विशुद्ध व्यक्तिगत विषय के रूप में स्वीकार किया, जिसने इस विचार को ग्रहण किया कि राज्य को।किसी विशेष धर्म की स्थापना नहीं करनी चाहिए, तथा जिसने चर्च एवं राज्य के मध्य एक न्यायसंगत विभेदीकरण का समर्थन किया

05 शैक्षिक प्रभाव

अमेरिकी क्रान्ति का एक परिणाम यह भी हुआ कि अमेरिका में सार्वजनिक शिक्षा के महत्त्व को प्राथमिकता दी गई। अमेरिका के नेताओं को इस सत्य का अहसास था कि लोकतन्त्र की सफलता जागरूक एवं प्रबुद्ध मतदाताओं पर निर्भर करती है। टामस जैफरसन ने इस प्रसंग में कहा था कि, सब चीजों से ऊपर मुझे यह आशा है कि जनसाधारण की शिक्षा की ओर ध्यान दिया जायेगा। मुझे यह विश्वास है कि लोगों के अच्छे ज्ञान से हम यह भरोसा कर सकते हैं कि वे स्वतन्त्रता की काफी हद तक रक्षा कर सकेंगे। क्रान्ति के बाद अमेरिका की सरकार ने सार्वजनिक शिक्षा के महत्त्व को स्वीकार करते हुये, 1785 के ‘भूमि अध्यादेश’ के माध्यम से लाखों एकड़ भूमि को सार्वजनिक स्कूलों के लिए आरक्षित कर दिया, तथा 1787 के ‘नार्थवेस्ट आर्डिनेन्स’ द्वारा सार्वजनिक शिक्षा की माकूल व्यवस्था करने का प्रयास किया ।

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