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नेपोलियन के 06 आन्तरिक सुधार

नेपोलियन के 06 आन्तरिक सुधार इस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रांस की स्थिति को सुदृढ़ करने के बाद नेपोलियन ने फ्रांस की आन्तरिक सुधार-प्रक्रिया पर अपना ध्यान केन्द्रत किया। हेज ( माडर्न यूरोप टू 1870) के शब्दों में, ‘कान्सुलेटका काल ( 1799-1804) फ्रांस की संस्थाओं के विकास में बोनापार्ट के मुख्य एवं सर्वाधिक स्थायी योगदानों […]

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नेपोलियन बोनापार्ट का प्रारंभिक जीवन और उसका उत्कर्ष

नेपोलियन बोनापार्ट का प्रारंभिक जीवन और उसका उत्कर्ष नेपोलियन बोनापार्ट (1769-1821) का नाम विश्व इतिहास के उन महत्त्वपूर्ण एवं चमत्कारी व्यक्तियोंमें शामिल किया जाता है जिन्होंने शक्ति के अत्यधिक केन्द्रीकरण के माध्यम से इतिहास के एक युग कोअपने विचारों के अनुकूल दिशा प्रदान की। नेपोलियन का योगदान कितना सार्थक था, या कितना घातक था, इस […]

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अमेरिकी क्रान्ति के 05 परिणाम

अमेरिकी क्रान्ति के 05 परिणाम अमेरिका की क्रान्ति या स्वतन्त्रता संग्राम विश्व इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण एवं युगांतरकारी घटना थी। विश्व के इतिहास में राजनीतिक दृष्टि से इस क्रान्ति का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान यह था कि इसनेराजतन्त्र एवं कुलीनतन्त्र के स्थान पर लोकतन्त्र के आदर्श को प्रतिष्ठापित किया। इस दृष्टि से अमेरिका कीक्रान्ति फ्रांस की […]

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अमेरिकी क्रान्ति/स्वतन्त्रता संग्राम का तात्कालिक कारण : शुरुआत, प्रगति एवं घटनाक्रम (1773 से 1783)

अमेरिकी क्रान्ति/स्वतन्त्रता संग्राम का तात्कालिक कारण : शुरुआत, प्रगति एवं घटनाक्रम (1773 से 1783) ब्रिटिश सरकार की विशिष्ट चाय नीति : 1773 में ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई एक गलती ने अमरीकी उपनिवेशवासियों में क्रान्ति की भावना को प्रस्फुटित होने का अवसर प्रदान किया यह गलती थी प्रधानमंत्री लार्ड नार्थ द्वारा अपनाई गई विशिष्ट चाय […]

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अमेरिका की क्रान्ति के 05 कारण

अमेरिका की क्रान्ति के 05 कारण संयुक्त राज्य अमेरिका जो आज विश्व की सबसे बड़ी शक्ति है, सत्रहवीं शताब्दी के आरम्भ में अपने विकास की आरम्भिक अवस्था में था और यूरोपीय देशों को अधीनता में था। अमेरिका पहुँचने वाले प्रथम यूरोपीय लोग 1000 ईस्वी के लगभग, आइसलैंड एवं ग्रीनलैण्ड के नोर्स समुद्री लोग (Norse Seamen) […]

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यूरोप में पूँजीवाद के उद्भव के 07 कारण

यूरोप में पूँजीवाद के उद्भव के 07 कारण यूरोप में पूँजीवाद का अभ्युदय 15वीं शताब्दी में हो गया था इसका बीजारोपण ब्रिटिश पूँजीवादी क्रान्ति से माना जाता है (इंग्लैण्ड का गृह युद्ध, 1639 48) । जब इंग्लैण्ड के तानाशाही राजा चाल्ल्स प्रथम का सिर काट कर बांस पर टांग कर उसका अन्त कर दिया था […]

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यूरोप में पूंजीवाद का उद्भव

यूरोप में पूँजीवाद का उद्भव यूरोपीय संदर्भ में इतिहासकार जे.ई. स्वेन ने लिखा है कि, “मध्य युग सामान्यतः उस काल के लिए प्रयुक्त किया जाता है, जो कि पश्चिमी यूरोप में रोमन साम्राज्य के पतन से पुनर्जागरण और धर्म सुधार आन्दोलन के प्रारम्भ तक चलता है।” इस प्रकार अतीत की घटनाओं के आधार पर यूरोपीय […]

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All about प्रतिवादी धर्मसुधार

All about प्रतिवादी धर्मसुधार प्रोटेस्टेण्ट धर्मसुधार आन्दोलन की सफलता के बाद सन् 1540 ई. के आस-पास ऐसा प्रतीत होने लगा था कि पारस्परिक कैथोलिक ईसाईवाद अपनी आखिरी साँसे गिनने की कगार पर आ गया है। उत्तरी एवंकेन्द्रीय जर्मनी, लूथरवाद के प्रभाव में कैथोलिक धर्म को अस्वीकार कर चुका था। स्कैन्डिनेविया पूरी तरह से लूधरवादी हो […]

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धर्मसुधार आंदोलन के 07 परिणाम

धर्मसुधार आंदोलन के 07 परिणाम सोलहवीं शताब्दी में यूरोप के इतिहास में घटित धर्मसुधार आन्दोलन ने यूरोप के धार्मिक परिदृश्य पर तो भारी उथल-पुथल मचा ही दी, साथ ही इसके कुछ प्रभाव यूरोप के राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक जीवन में भी दिखाई देने लगे। जैसा कि ल्यूकस (रिनेसां एंड दि रेफर्मेशन) ने लिखा है, ‘सोलहवीं […]

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धर्मसुधार आन्दोलन की 03 धाराएँ

धर्मसुधार आन्दोलन की 03 धाराएँ धर्मसुधार आन्दोलन या प्रोटेस्टेंट क्रान्ति का सूत्रपात सबसे पहले मार्टिन लूथर के द्वारा जर्मनी में हुआ। जहाँ पुनर्जागरण का प्रारम्भ सबसे पहले इटली में हुआ, वहाँ धर्मसुधार आन्दोलन की लहरें सबसे पहले जर्मनी में दिखाई दीं जर्मनी के बाद यूरोप के अन्य देशों में भी धर्मसुधार आन्दोलन की भावना प्रसारित […]